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Friday, April 28th, 2017
2019 का चुनाव VVPAT मशीनों से होगा, केंद्र ने मंजूर किया 3,000 करोड़ का फंड

2019 का चुनाव VVPAT मशीनों से होगा, केंद्र ने मंजूर किया 3,000 करोड़ का फंड

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by April 19, 2017 India

नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने कहा है कि 2019 का चुनाव VVPAT मशीनों से होगा. बुधवार को ही कैबिनेट ने VVPAT मशीन खरीदने की मंज़ूरी दी है. नई पेपर ट्रेल मशीनों के लिए चुनाव आयोग ने 3,000 करोड़ रुपये मांगे थे. कैबिनेट ने वीवीपैट मशीन खरीदने के लिए चुनाव आयोग को फंड देने का फैसला लिया. देश में कुल 16 लाख ईवीएम मशीनें लोकसभा चुनावों में इस्तेमाल होती हैं और इतनी ही वीवीपैट मशीने चाहिए. इस बारे में चुनाव आयोग ने सरकार से कई बार पैसे की मांग की थी और पिछली 22 मार्च को एक बार फिर से आयोग ने कानून मंत्री को इस बारे में चिट्ठी लिखी थी.

क्या है वीवीपैट (VVPAT)?
वीवीपैट (VVPAT) यानी वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल एक प्रिंटर मशीन है ईवीएम की बैलेट यूनिट से जुड़ी होती है. ये मशीन बैलेट यूनिट के साथ उस कक्ष में रखी जाती है जहां मतदाता गुप्त मतदान करने जाते हैं. वोटिंग के समय वीवीपैट से एक परची निकलती है जिसमें उस पार्टी और उम्मीदवार की जानकारी होती है जिसे मतदाता ने वोट डाला. वोटिंग के लिये ईवीएम का बटन दबाने के साथ वीवीपैट पर एक पारदर्शी खिड़की के ज़रिये मतदाता को पता चल जाता है कि उसका वोट संबंधित उम्मीदवार को चला गया है. मतगणना के वक्त अगर कोई विवाद हो तो वीवीपैट बॉक्स की पर्चियां गिनकर ईवीएम के नतीजों से मिलान किया जा सकता है.

वीवीपैट लगाना ईवीएम पर भरोसा जगाने का कदम
चुनाव आयोग ने कहा है कि उसका इरादा अगले लोकसभा चुनावों तक हर ईवीएम के साथ एक वीवीपैट (वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) मशीन लगाने का है जिससे चुनाव में गड़बड़ी के सारे शकसुबहे दूर होंगे.

क्या है वीवीपैट की स्थिति?
चुनाव आयोग ने 2014 के लोकसभा चुनावों के साथ वीवीपैट का इस्तेमाल शुरू किया है. आयोग का इरादा 2019 तक सारी ईवीएम के साथ वीवीपैट जोड़ने का है लेकिन अब तक केवल करीब 58000 वीवीपैट मशीनें ही आ पाई हैं. चुनाव आयोग ने हाल में गोवा विधानसभा चुनावों में हर बूथ पर वीवीपैट का इस्तेमाल किया.

वीवीपैट हासिल करने में क्या दिक्कत है?
आयोग का कहना है कि वीवीपैट मशीन हर बूथ पर लगाने के लिये उसे कुल 3174 रुपये चाहिये. इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में केस चल रहा है और उच्चतम न्यायालय ने 2012 में चुनाव आयोग से चरणबद्ध तरीके से हर ईवीएम के साथ वीवीपैट जोड़ने को कहा है. चुनाव आयोग का कहना है कि वीवीपैट के लिये केंद्र सरकार से लगातार रकम की मांग की जा रही है और अगर पूरा पैसा मिल जाये तो 30 महीने के अंदर पर्याप्त वीवीपैट मशीन आ जायेंगी.

क्यों ज़रूरी है वीवीपैट?
वीवीपैट से न केवल मतदाता को अपने वोट के सही उम्मीदवार को जाने की तसल्ली होगी बल्कि विवाद होने पर वोटिंग का पेपर ट्रेल भी उपलब्ध रहेगा. इस तरह से ईवीएम को लेकर उठाये जा रहे सवालों को पूरी तरह हल किया जा सकता है.

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